-:Rashtriya Sanskrit Sansthan:-


होरासार - Horasar

(Under the Project of content Generation with a view to develop E-Databank,
E-Learning and E-Sources of Sanskrit Text.)


Chief Director
Prof. Radha Vallabh Tripathi
Vice Chancellor

Director
Prof. Sarva Narayan Jha
Acting Principal, Rashtriya Sanskrit Sansthan, Lucknow Campus,


National Coordinator
Dr. Sukala Mukherjee
Project Officer
(RSKS, New Delhi)

Principal Investigator
Prof. Sarva Narayan Jha


Department Of Jyotish
Rashtriya Sanskrit Sansthan,
(Deemed University)
Lucknow Campus, Lucknow



दो शब्द

ज्योतिष शास्त्र में विशेष रूप से जातक स्कन्ध में ग्रन्थपञ्चक अर्थात् फलित ज्योतिष के पाँच महत्वपूर्ण ग्रन्थों में बृहत्पराशरहोरा, बृहत्जातक, सारावली, जातकपारिजात और होरासार माने गए हैं। बृहत्पराशरहोराशास्त्र और बृहत्जातक को एक तरफ तथा जातकपारिजात और सारावली को दूसरी तरफ मानक ग्रन्थ के रूप में देखा जा सकता है। इसके बाद यदि कोई महत्वपूर्ण ग्रन्थ, ग्रन्थ पञ्चक में स्थान पाने के लिए अर्ह है तो वह पृथुयश कृत होरासार है। पृथुयश को वराहमिहिर के यशस्वी पुत्र के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त है। इस ग्रन्थ में 32 अध्याय और 1209 श्लोक हैं। यह ग्रन्थ फलित ज्योतिष के महत्वपूर्ण ग्रन्थों में से एक है। इसमें राशि विभाग, ग्रहों की प्रकृति, ग्रह बल, दशा फल, ग्रहों के प्रभाव, अष्टकवर्ग, राजयोग, ग्रहों का भावों पर प्रभाव, ग्रहयुति आदि विषय वर्णित तो हैं ही, साथ-साथ नक्षत्र जातक जैसे विषय भी प्राप्त होते हैं।

उपर्युक्त ग्रन्थ का E-text के रूप में सम्पादन से छात्रों एवं गवेषकों को कम्प्यूप्टर, स्मार्टफ़ोन या टेबलेट के माध्यम से पाठ्यसामग्री की सरलता से प्राप्ति होगी। किसी भी विषय को सरलता एवं शीघ्रता से खोजा जा सकेगा। इसे ऑडियो फाइल में आसानी से परिवर्तित किया जा सकेगा, जो प्रज्ञाचक्षु छात्रों एवं गवेषकों के लिए अत्यन्त लाभप्रद सिद्ध होगा।


प्रो. सर्वनारायण झा